Many lives come and go but the ethoes of some of them remain,to touch our souls in unforseen ways. Lives of these heroes speak to our hearts and give us strength for finding the inspiration within ourselves to write the story of our own life.
Wednesday, December 9, 2015
Wednesday, February 11, 2015
A great love story.
Have read the great love story of
Dostoevsky and his wife Anna. Heart touching story and gave me the feeling of Charlie
Chaplin’s film Limelight.
It is the time when there is an
urgent need of such a concept of love. So the youngsters in printed shirt, cooling
glass, low waist jeans with earphone in ear could realise the concept of love. For these ‘modern’ youngsters love is everywhere, it is on
internet, over phone, on roads, in malls, in shopping complexes, in PVRn n
cinema halls, in schools and colleges and in restaurants but it is far away
from their life. One day they love someone, next day they get fade up with
that. Their love is very much calculated, it is purely based on the outward
appearance or money.
Love, if taken ethically give
strength and creativity and such a relationship can never be fade up. Love which is based on higher morality and ethics gives
new life. Dostoevsky and Anna’s lives proved
that love can last forever when it is based on values and respecting the
qualities of each other.
Such a love even do not ended, when one of the two do
not alive. When Anna got marry with Dostoevsky, at that time she was young and
bright lady and Dostoevsky was a TB patient, a men who was in queer street.
Dostoevsky died after 15 years of their marriage at the age of sixty. After his
death Anna throughout her life was involved in finishing and publishing the
incomplete literature of Dostoevsky. It is she who brought Dostoevsky into
limelight by publishing his work after
his death. But she kept herself as an inglorious. Such was their great love.
Monday, December 1, 2014
आधुनिक युग का 'प्रगतिशील' साहित्य
मन्नू भंडारी और अमृता प्रीतम के बाद के 'आधुनिक प्रगतिशील' लेखकों में मैंने शायद ही किसी को पढ़ा होगा। लेकिन अब आकर जिन्हे पढ़ा उनकी 'प्रगतिशील' लेखनी को सड़ा ,गला और दुर्गन्ध पूर्ण पाया। लगता है इस दुर्गन्ध पूर्ण समाज की प्रगतिशीलता भी दुर्गन्ध पूर्ण हो गयी है।
Wednesday, August 6, 2014
महामारी का शिकार
Tuesday, June 10, 2014
वो बहनें, जो अब नहीं रहीं
जो न जानती थीं, हत्या व बलात्कार का मतलब
जिन्होंने न देखे थे पुलिस और थाने
जो पढ़ती थीं स्कूल में और छीलती थीं लहसुन खेत में
आज वो पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जाँच का विषय बन गयी हैं
वो टहनियाँ जिनसे टपकती थीं पकी-पकी आमियां
झूलती थीं जिन पर वो तीजो के झूले डालकर
वो चुन्नियाँ जो लहराती थीं उनके गले में
आज वो फाँसी की रस्सियाँ बन गयीं हैं
वो अंगूठियां और कड़े जो पहनती थीं हाथ में
वो किताबे और कापियां जिनमे थे कहानी और किस्से
वो खूटियां टंगे है जिन पर उनके नये-नये कपड़े
आज वो जीता जागता इतिहास बन गये हैं
वो गलियाँ, वो कुएं जहाँ होती थीं सहेलियों से बातें
वो रास्ते , वो छते जहाँ से देखतीं थीं वो बारातें
वो घर, वो आँगन जहाँ गूंजती थीं उनकी आवाजें
आज वो पुलिस और नेताओं के पर्यटन बन गये हैं
वो वहशी, वो दरिंदे जिन्हे मिली थीं इंसानी जिंदगियां
जिनके लिए अब जीवन का सबब है जेले और काल कोठरियाँ
मगर जिनकी फिक्रमंद है ये राजनीति और सियासत
वो इंसानियत को रौंदकर फांसी के असली हक़दार बन गये हैं
Friday, May 9, 2014
एक वो सुबह
Tuesday, May 6, 2014
सुन्दर समाज
Thursday, June 28, 2012
रास्ता .....
घर तुम्हारे बिना दीवारों की एक इमारत बन गया है
हर्ष और उल्लास तो मानो सामान बांधकर कंही चला गया है
एक हँसता हुआ चेहरा अब कही दिखाई नहीं देता है
एक रोबदार आवाज अब कही सुनाई नहीं देती है
अब तुम घर के दरवाजे पर खड़े, मेरे आने का इंतजार नहीं करते
आँखों से ओझल होने तक ,मुझे हाथ हिला कर विदा नहीं करते
धूल के अद्रश्य दरवाजो को खोलते हुए,तुम मुझे यंहा अकेला छोड़
किसी पहाड़, जंगल या नदी की और चले गए हो
और खुद एक पहाड़ ,नदी या तारा बन गए हो
असहनीय दर्द में भी तुम्हे जीवन में विश्वास था
धीरे धीरे टूटती दीवारों के बीच भी तुम पत्थरों की अमरता खोज लेते थे
जब भी मै तुम्हारे पास आती, तुम अपना सारा दुःख छिपा लेते थे
साडी लड़ाई तुम लड़ते थे ,लकिन जीतती सिर्फ मै थी
तुम्हारे कमरे की हर चीज़ ,हर कोना,
तुम्हारे साथ बिताये वक़्त की मुझे याद दिलाता है
तुम्हारी किताबे, कपडे,और दवाइयों की ख़ाली शीशिया तक
तुम्हारे आसपास होने का मुझे अहसास दिलाते है
बेलो से लेकर बगीचे का हर पौधा,आँगन में खड़ा पेड़ तक
घर के दरवाजे से लेकर,घर की सीढ़िया और आँगन तक
हर वस्तु तुम्हारे वापस आने का रोज मेरे साथ इंतजार करती है
और तुम्हारे न आने पर वे सब भी मेरे साथ रोते है
आदमी अकेला नहीं मरता, मरता है घर का एक एक जन थोड़ी थोड़ी सी मौत
और घर भर में टहलता रह जाता है दुःख
मगर दुःख और अंतहीन इंतजार के अंधियारे में हमें मिलता है एक रास्ता
एक आदमी के पसीने और रक्त से बना हुआ
और हमारे पांवो को पुकारती है उस रस्ते की धूल
Friday, June 10, 2011
ज़िन्दगी.......
जीवन का क्रम हमेशा चलता रहता है चाहे परिस्थितियां अनुकूल हो या प्रतिकूल हो . कभी तो एक लक्ष्य की दिशा में बिलकुल शांत, बिना बाधाओं के चलता रहता है और कभी इतना विषम हो जाता है की अपनी सारी शक्ति से संघर्ष करने पर भी, विषमताओं में उलझकर रह जाता है, लकिन फिर भी चलता रहता है. जीवन की विषम परिस्थियों का संघर्ष इंसान को मानसिक तौर पर कठोर तो बना देता है लकिन खुद को कठोर बनाने के संघर्ष में जो पीड़ा होती है वह अकथनीय है. हर चीज़ का केंद्र हमारा दिमाग ही नहीं बल्कि दिल भी होता है और इसीलिए मानसिक रूप से कठोर होने पर भी एक इंसान इंसानी भावनाओ से मरहूम नहीं हो सकता है.हालाकि प्रत्येक कठोर अनुभव चरित्र के किसी न किसी अंग की पुष्टि तो करता है लकिन कुछ अनुभव इतने कटु होते है की वो चरित्र के अंग की पुष्टि करने के बजाये आपको एक ऐसी जगह पर ले जाकर खड़ा कर देते है कि या तो आप ज़िन्दगी कि सच्चाई झुठलाकर जिंदा रहे या फिर इंसानी भावनाओ को मारकर जिंदा रहे. लेकिन ज़िन्दगी कि कुछ सच्चाइयां ऐसी होती है जिनको कितना भी झुठलाने कि कोशिश करें लेकिन झुठलाया ही नहीं जा सकता है क्योकि सच्चाई को तो समुन्दर में भी नहीं डूबोया जा सकता है .इसीलिए आपको ज़िन्दगी के कड़वे अनुभवों से सीख कर ,ज़िन्दगी कि वास्तविकताओं को स्वीकार कर मानसिक तौर पर कठोर हो कर ज़िन्दगी के विषम संग्राम को स्वीकार करना ही चाहिए.मैंने जो अपनी ज़िन्दगी के कड़वे अनुभवों से सीखा वो ये है कि असल चीज़ ज़िन्दगी नहीं हिम्मत, सब्र और प्यार कि शक्ति होती है जो इंसान को किसी भी परिस्थिति में जीने कि कला सीखा देते है . ज़िन्दगी तो मौत कि मुज़रिम है जो कभी भी गिरफ्तार हो सकती है और मौत से जयादा सच्ची हकीकत दुनिया में दूसरी नहीं है . जो जीवन का सुख भोगता है उसे एक न एक दिन जाना भी पड़ता है और मनुष्य कि इच्छाओं कि तो कोई सीमा ही नहीं है. हम जिन लोगो को दुनिया में सबसे अधिक प्रेम करते है उन्हें हमेशा अपने साथ देखना चाहते है ,लेकिन ऐसा होना संभव ही नहीं है . जो संसार में आया है उसे जाना भी पड़ता है.
ज़िन्दगी के ये कड़वे अनुभव ही हमें ये सोचने पर मजबूर कर देते है कि ज़िन्दगी आखिर है क्या? प्राण धारण कर बस किसी भी तरह जिंदा रहने कि जद्दोज़हद में जुट जाना और एक दिन उस जद्दोज़हद को छोड़कर प्राण त्याग देने को ही क्या ज़िन्दगी कहा जा सकता है? या ऊँची नीची राहों से चलकर एक ठीक से मुकाम तक पहुँच जाना ही ज़िन्दगी है? या फिर अनजानी गलियों से गुजरने का दर्द भरा सैलाब जिस अनचीहे और अनचाहे मुकाम तक ले जाता है ,वही ज़िन्दगी है. अगर ये नहीं है तो फिर आखिर क्या है ज़िन्दगी?
ज़िन्दगी कि विषम परिस्थितियों से ऊपर उठकर ,अपने आप को समाज कि तरक्की के संघर्ष के लिए समर्पित कर देना ही ज़िन्दगी है .ज़िन्दगी कि ये जो परिभाषा मैंने अपने दादाजी कि ज़िन्दगी से सीखी मुझे लगता है कि उसके अलावा ज़िन्दगी और कुछ हो ही नहीं सकती है जो ज़िन्दगी के आखिरी समय तक ये कहते रहे ''मैंने अपने जीवन क़ी हर सुबह को शाम होने के इंतजार में और हर शाम को सुबह होने के इंतजार में व्यर्थ नहीं गंवाया है .मै मनुष्य के जीवन को प्यार करता था और उसी के सोंदर्य के लिए ही मै संग्राम करने निकल पड़ा था . मै मनुष्य कि ख़ुशी के लिए जिया और उसी ख़ुशी को साथ ले कर जा रहा हूँ.
Tuesday, June 7, 2011
The hardest goodbye
There is nothing more painful in life
Than losing a loved one
How could I say goodbye to you Pitaji
As your time had come
Doctors said you’re gone and its done
I knew that it was coming
But I never dreamt that you would go so soon
At last pain and suffering is gone
But I have lost my smile and laughter with you
I am completely lost without you
When I look towards the sky
All I see is visions of you
Whenever I close my eyes
All around me I find only you
If tears could build a stairway
And memories a lane
I could walk to you
And bring back you home again
But memories are just memories
And tears are just tears
I miss you every movement
And hold you near to my heart
Without you its too much pain to carry on
I miss your stories, your teachings
I miss your love, your hugs
Days will come and go
And the world would move on
I miss you so much that
Would never find my way without you
Not a second passes
When you are not in my mind
The sun, The moon, The stars, The days , The nights
All remind me of you
I feel your presence every moment
The last words you said resound within me-
“Death is a challenge
It tells us not to waste time
Tells us to love whole of humanity
Never forget yesterday
But always live for today
Because you never know
What tomorrow can bring
Or what it can take today’’
This is the truth of life
But how could I say goodbye
This is the hardest goodbye I have ever dealt with
I know now you are away from extreme pain
But I also know now I will never meet you again
I will never get a chance to say you bye
I will never get a chance not to cry
A million times I have missed you
I million times I have cried
If love could have saved you
You never could have gone
As long as I live, you too will live
Without you I cannot survive as I am the part of you









